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उदाहरण

तेरी आँखों की गहराई में कुछ इस तरह खो गए, हम। कि खुद से भी बेख़बर, तेरे इश्क़ में डूब गए, हम। हर साँस में अब तेरा ही नाम पुकारता है दिल मेरा, जैसे कोई दुआ, जो सदियों से माँग रहे थे, हम। न दिन की खबर है अब, न रातों का सुकूँ बाकी है, तेरे हिज्र में जलकर, बस राख होते जा रहे हैं, हम। ये कैसी तड़प है, ये कैसा इंतज़ार है, मौला! हर पल जैसे तेरी चाहत में फ़ना हो रहे हैं, हम।

ज़िंदगी एक सफ़र है, अनजाना सा रास्ता, कहीं धूप की तपिश है, कहीं छाँव का वास्ता। हर मोड़ पर मिलती है नई मंज़िल की पुकार, कभी हिम्मत बँधाती है, कभी बढ़ाती है गुबार। गिरते हैं, सँभलते हैं, फिर उठ खड़े होते हैं, यही तो है इम्तिहाँ, जो हमें मज़बूत करते हैं। ख्वाबों के परों से भरते हैं ऊँची उड़ान, हर पल में ढूँढते हैं हम इक नया जहान। क्या ग़म, क्या खुशी, सब गुज़र जाने हैं पल, बस रह जाती है यादें, और आने वाला कल।

उनके हुस्न की क्या मिसाल दूँ, कोई लफ्ज़ नहीं, जैसे नूर हो कोई, जैसे जन्नत की रौनक यहीं। वो जब आते हैं महफ़िल में, महक उठती है फिज़ा, हर दिल की धड़कन बढ़ जाती है, हर निगाह है फना। उनकी ज़ुल्फ़ों का साया, जैसे शब-ए-ग़म की पनाह, और लबों की हँसी, जैसे सुब्ह-ए-बहार की राह। निगाहें उनकी, जैसे गहरी झील कोई हो, जिसमें डूब जाने को हर आशिक़ बेताब हो।

शहर की गलियों में खोए हुए लोग कई, चेहरों पर उदासी, आँखों में नमी। हर कोई दौड़ रहा है, अपनी धुन में मगन, ना पास कोई खड़ा है, ना कोई हमदम। रिश्तों की डोरें भी अब कमज़ोर सी हुईं, ज़िंदगी की हक़ीक़त जाने कहाँ खो गई। ख़ुदगर्ज़ी के बादल कुछ यूँ छाए हैं यहाँ, कि अपनों की पहचान भी धुँधली सी हुई। ऐ इंसान! ज़रा ठहर, देख ले अपने गिर्द, कहीं खो न दे तू ख़ुद को इस भीड़ में कहीं।

ग़मों की रात चाहे कितनी भी लंबी हो, उम्मीद का दिया बुझने न देना कभी। हर शब के बाद एक सहर ज़रूर आती है, हर आँसू के पीछे एक मुस्कान खिल जाती है। माना कि राहें कठिन हैं, मंज़िल दूर है कहीं, पर हौसलों से ही तो मिलती है कामयाबी। टूटे हुए दिल को फिर से जोड़ना सीख ले, ज़िंदगी की हर जंग को जीतना सीख ले। यही तो है असली सबक़, ये ही है असली फ़लसफ़ा, कि हर मुश्किल के बाद आती है नई बहार।

तन्हाई के आलम में जब याद आती है तुम्हारी, आँखों से बरसने लगती है बेताबियाँ हमारी। हर लम्हा गुज़रता है जैसे सदी कोई हो, रूह को सुकून नहीं, जैसे कोई खोई हुई चीज़ हो। महफ़िलें भी अब बेमानी सी लगती हैं मुझको, जब से तुम्हारी कमी हर जगह महसूस हुई मुझको। काश तुम पास होते, मेरे हमदम, मेरे हमराज़, तो ये दिल का वीराना यूँ सूना न होता आज।

दुनिया की ये रंगीनियाँ, ये सब फ़ानी हैं दोस्त, असली हक़ीक़त तो फ़ना है, ये कहानी है दोस्त। क्या है दौलत, क्या है शोहरत, सब मिट्टी हो जाना है, बस रह जाती है नेकियाँ, और ये ज़ुबानी है दोस्त। इश्क़-ए-हक़ीक़ी में डूब जा, यही सुकून का रास्ता है, बाकी सब तो इक धोखा है, इक बेमानी है दोस्त। अपने अंदर की आवाज़ सुन, वही है तेरा रहबर, ख़ुद को पहचान ले, यही ज़िंदगानी है दोस्त।

बहारों का मौसम आया है, गुलशन में ख़ुशबू बिखरी है, हर शाख़ पे कलियाँ महक उठी हैं, हर सुब्ह सुहानी निखरी है। परिंदे चहकते हैं शादाब बग़ीचों में, कोई नग़मा सुनाते हुए, हवाएँ मदहोश करती हैं दिल को, इठलाती, बलखाती हुई। ये मंज़र-ए-फ़ितरत, ये कुदरत का करिश्मा, दिल को सुकून देता है, हर पत्ता, हर फूल, हर डाली, कोई पैग़ाम कहता है। आओ, इस हुस्न-ए-जहाँ को देखें, अपनी नज़र से, कहीं ये हसीं लम्हे, गुज़र न जाएँ, हमारे बिना ख़बर से।

कभी लफ़्ज़ों में ढलता है मेरा दर्द-ए-निहाँ, कभी आहों में सिमट जाता है, ये दिल का अफ़साना। शायरी तो बस एक बहाना है, इज़हार-ए-ग़म का, वरना कौन सुनता है, ये टूटे हुए दिल की दास्तान। कलम जब चलती है कागज़ पर, तो रूह रो पड़ती है, हर हर्फ़ में छुपी है कोई अनकही सी पीर-ए-जाँ। इसी से राहत मिलती है, इसी में सुकून है मेरा, यही तो है मेरी महफ़िल, यही है मेरा जहान।

गुज़र जाएगी इक दिन ये हयात, ये शाम और सहर, बाकी रह जाएँगी बस यादें, और किसी की नज़र। जो काम आए थे औरों के, वो सदा याद रहेंगे, जो सिर्फ़ अपने लिए जिए, वो बेनाम रहेंगे। मिट्टी के हैं पुतले, मिट्टी में मिल जाना है हमें, पर कुछ ऐसा कर जाएँ, कि ज़माना याद करे हमें। अपने किरदार से रौशन कर दें, हर एक दिल को, यही तो है सच्ची विरासत, यही है मुकम्मल ज़िंदगानी।

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सामान्य प्रश्न

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