जब से तुम दूर हुए हो, हर लम्हा सदियों सा लगता है। यह जुदाई का दर्द तो रूह तक को जलाता है। अब तो बस तेरी यादों में ही दिन गुज़रते हैं, क्या पता फिर कब ये दूरियाँ सिमट जाएँ।
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जुदाई, दूरी, और किसी की कमी पर शायरी।
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उदाहरण
वही गलियाँ, वही रास्ते, बस तुम ही नहीं हो साथ। हर कोने में तेरी यादों का साया है, जो करता है बात। कैसे भूलूँ वो हँसी, वो पल, वो प्यारी मुलाक़ातें, जुदाई में भी जी रहे हैं, इन्हीं मीठी-कड़वी यादों के साथ।
इन आँखों को तेरा इंतज़ार है, कब तक तड़पायेंगी दूरियाँ? हर साँस में बस यही दुआ है, फिर से मिलें वो नज़दीकियाँ। कब तक सहें ये जुदाई का गम, कब तक ये तन्हाई सताएगी, ऐ खुदा, अब तो मिला दे उसे, यही आरज़ू दिल में समाई है।
तेरी जुदाई में दुनिया वीरान लगती है, हर खुशी बेमानी, हर मुस्कान फीकी लगती है। जब से तुम गए हो, रंग सारे फीके पड़ गए हैं, अब तो बस एक उम्मीद पर ये दिल धड़कता है।
दूरियाँ हैं तो क्या हुआ, दिल में तो तुम बसे हो। माना राहें जुदा हैं, पर मंज़िल एक ही तो सोचते हो। ये जुदाई तो बस एक इम्तिहान है हमारे प्यार का, ज़रूर मिलेंगे एक दिन, ये वादा है हमारे इकरार का।
किस्मत का खेल है सारा, या वक़्त की है ये साज़िश? क्यूँ जुदा कर दिया हमें, पूरी न हुई कोई ख्वाहिश। क्या कसूर था हमारा, या प्यार ही था इतना गहरा? जो आज ये जुदाई का दर्द, बन गया है हमारा पहरा।
माना फासले हैं दरमियाँ, पर प्यार कम न होगा। ये जुदाई का मौसम भी, एक दिन तो थमेगा। तेरी यादों का दिया, हर पल जलता रहेगा दिल में, कितनी भी दूर रहो तुम, मेरा इश्क़ अमर रहेगा।
रात भर आँसू बहाए हैं, तेरी याद में हमने। हर सुबह उम्मींद की किरण ढूंढते हैं, इस गम में हमने। ये जुदाई की रातें, कटती ही नहीं हैं अब, कब मिलेगा सुकून, कब थमेंगे ये दर्द के सबब।
खामोश हैं लब मेरे, पर दिल में शोर है। जुदाई का ये आलम, अब और नहीं होता सहन। किसी को क्या बताएँ, क्या गुज़रती है हम पर, बस चुपचाप जी रहे हैं, इस विरह की लहर पर।
नज़रें बिछाई हैं हमने, तेरे इंतज़ार में। हर आहट पर लगता है, शायद तुम ही हो उस पार में। ये वक़्त भी कितना ज़ालिम है, कटता ही नहीं है अब, अब तो बस मिलन की आस है, कब पूरी होगी ये हसरत।